Wednesday, March 19, 2025

वॉकिंग कॉलोनी में



दस से ग्यारह के बीच वॉक पर निकलती हूँ कॉलोनी के पार्क के ट्रैक पे ।


सबेरे काम रहता है । दोपहर में बहुत गर्मी होती है ।वैसे रात को एक बार फिर निकलती हूँ वॉक पे । इस तरह हर दिन एक हज़ार के आसपास स्टेप्स हो जाते हैं ।


आज मैं निकली ग्यारह बजे फ्लैट से और लिफ्ट का बटन दबाते ही लिफ्ट का दरवाजा खुला और मैं अंदर लिफ्ट में । ग्राउंड के लिये ‘ G ‘ बटन दबाई तो लिफ्ट टस से मस नहीं हुई ।


ऊपर देखी ब्लिंक कर रहा था ‘ क्रास ‘ मतलब बटन नहीं काम कर रहा था ।  अब लिफ्ट का दरवाज़ा तो खुल नहीं सकता था । तो मैंने फिर से ‘ G ‘ बटन दबाया ग्राउंड फ्लोर के लिये ।लिफ्ट घड़ घड़ आवाज के साथ चली फिर आवाज बंद हुई और लिफ्ट की लाइट चली गयी और लिफ्ट रूक गई । एक सेकेण्ड में लाइट आ गई ।


लिफ्ट के अंदर रोशनी और लिफ्ट का बटन काम न करे ।

एक पल को लगा मैं लिफ्ट में ऐसे ही बंद रहूँगी । दूसरे पल मैंने लिफ्ट के दोनों इमरजेंसी बटन दबाया ।


मुझे पता ही नहीं चल रहा था कि इमरजेंसी बटन काम भी कर रहा है कि नहीं 


फिर मैं लिफ्ट का दरवाज़ा ज़ोर ज़ोर से पीटने लगी । मुझे पता तो नहीं था कि कोई सुन रहा या नहीं पर मैं लिफ्ट का दरवाज़ा पीट रही थी ।


शायद चार पाँच बार पीटी होऊँगी । इसी बीच लिफ्ट का दरवाजा खुल गया ।


पांचवा या सातवां फ्लोर था होगा । अपने फ्लैट के दरवाजे के  सामने एक महिला अल्पना बना रही थी और जिस महिला ने लिफ्ट का दरवाजा खोला वो शायद नहा के निकली थी क्यों कि उसने बालों को टॉवल से बांधा था और मैक्सी में थी ।


मैंने पूछा - आपने लिफ्ट के दरवाजे को पीटने की आवाज से लिफ्ट खोला ?


उस महिला ने कहा- हाँ ।


और मैं सोंच रही थी कि अगर वो महिला अपना फ्लैट खोल कर बाहर अल्पना न बना रही होती तो main लिफ्ट के अन्दर बंद ही रहती ।


मैंने उन्हें भी बताया  मैने कि  लिफ्ट बंद हो गई थी ।


वह महिला मेरी सहायता करना चाह रही थी ।


उसने पूछा - किस फ्लोर में जाना है आपको ?


मैंने बताया कि जा तो मैं रही थी ग्राउंड फ्लोर ।


वह महिला फिर लिफ्ट का बटन दबाने लगी ग्राउंड फ्लोर के लिये और मैं सोंच रही थी कि भले मुझे तकलीफ़ हो मैं जाऊँगी ग्राउंड फ्लोर सीढ़ियों से ही ।अब लिफ्ट में नहीं घुसनेवाली मैं ।


इसी समय दो सिक्योरिटी वाले आ गये । 


मैंने कहा - लिफ्ट ख़राब है ।


वे बोले - इसीलिये तो हम आये हैं ।


और वे मुझे अपने साथ दूसरीवाली लिफ्ट से मेरे फ्लैट में छोड़ गये ।


लौट के बुद्धू घर को आये ।


मेरा वॉकिंग गया तेल लेने ।



Wednesday, January 29, 2025

हिस्सेदार

  


-इंदु बाला सिंह 


....माँ जी !....भैया का फोन आया था |

....अच्छा !

....पूछ रहा था ... माँ कैसी है ?

...अच्छा !....मुझे तो नहीं आया ?...

मकान के आउट हॉउस में नौकर का परिवार रखा गया था माँ की देखभाल के लिये |

फूलवाला

 


-इंदु बाला सिंह 


' फूलवाला !....फूलवाला ! '


एक छोटे डंडे में मल्ली फूल छोटी छोटी लड़ी लटका कर वह हर रोज शाम के पांच से साढ़े पांच के बीच हमारे मोहल्ले में आवाज लगाया करता था | उसकी आवाज आँखों में मेरी चमक ला देती थी | एक लड़ी का मूल्य था पचास पैसे | हर रोज मैं उस से फूल की एक लड़ी खरीदती थी और अपनी दो वर्षीय बिटिया के बालों में क्लिप से लगा देती थी | उसका खिला चेहरा देख मन प्रसन्न हो जाता था |

कुछ ही दिनों में हर रोज पचास पैसे खुचरा फूल के नाम से अलग रखना मुझे कठिन लगने लगा |


' सुनो ! ऐसा करो हर महीने एक साथ पैसे ले जाना | ' ---- एक दिन मैंने फूलवाले से कहा |

' ठीक है ..दीदी ! ' ----- वह खुश हो गया था | उसे एक ऐसा ग्राहक मिल गया जो उससे पूरे महीने फूल खरीदेगा |


तीन माह तक फूलवाला आता रहा | एक दिन मैंने सुना दंगा छिड़ा है | फूलवाला भी आना बन्द हो गया | दिन बीते मास बीते वर्ष भी बीत गया पर वो फूलवाला न आया | मै सोंचने लगी कहीं चला गया शायद | अवचेतन मन में डर सा लगा | कहीं किसी ने मार तो नहीं दिया !

फूलवाला न आया कभी |

याद आता है आज भी वो फूलवाला |

नजरिया

   


१९७२


-इंदु बाला सिंह 


श्रीमती जी ने दूध माप कर बर्तन में डालती हुयी दूधवाली से पूछा - तेरी लडकी की शादी ठीक ठाक हो गयी न ?

--- हाँ बीबी जी |

--- दामाद क्या करता है ?

--- मास्टरी करता है |

--- मैट्रिक पास करके ?

--- नहीं जी ! बी. ए. पास कर के |

मारे आश्चर्य के श्रीमती का मुंह खुला का खुला रह गया |

--- उसके पास जमीन जायदाद है ?

--- तीस बीघा जमीन है |

--- क्या क्या दिया लड़की को ?

--- तीन ठो चांदी की सिकड़ी |

--- तुम लोग रूपया नहीं देते ?

--- नहीं बीबी जी |

--- हम लोगो का तो शादी पर बहुत खर्चा होता है | हमने तो अपनी लड़की को कंगन , चूडियाँ , हार , अंगूठी , रेडियो ,   

   सोफा , पलंग और ऊपर से तीन हजार रुपया भी दिया है |

--- तब तो आपका दामाद बहुत पढ़ा लिखा होगा | बड़े बड़े खेत खलिहान होंगे उसके पास|

श्रीमती जी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया | दूधवाली से अपना बरतन पकडती हुयी बोली --- आज तो दूध पतला लग रहा है |

Sunday, January 19, 2025

मटर का दाना



#इंदु_बाला_सिंह 


पंद्रह वर्षीय ऋद्धि को हरी मटर खाना बहुत पसंद था ।उसने अपनी माँ से मटर लिया स्टील के कटोरे में और एक  स्टील के छोटी थाली ले कर अपने घर के बाहर के बरामदे में बैठ गयी ।


माँ रसोईं घर में खाना पका रही थी ।


ऋद्धि मटर छिल रही थी और दाने खाती जा रही थी ।


मटर के फलियों के छिलके जमा होते जा रहे थे थाली में और कटोरा खाली हो रहा था ।


मटर छिलते समय एक मटर का दाना थाली के छिलकों के ढेर में जा गिरा ।


‘ अरे! एक मटर का दाना गिर गया ।… जाने दो एक दाना गिर गया तो क्या हुआ ।’ - ऋद्धि ने सोंचा ।


फिर उसे कहानी की वह चिड़िया याद आयी  जिसका एक डाल का दाना पेड़ के ठूँठ में गिर गया था । उस चिड़िया ने अपना दाना पाने के लिये कितना परिश्रम किया ।और वह थाली के छिलकों के बीच से अपना दाना नहीं ढूँढ सकती है ।


ऋद्धि थाली के छिलकों को हटाने लगी । बीच में उसे मटर का दाना दिखा ।


ऋद्धि मटर का दाना खा ली ।


फिर से कटोरे के बची मटर की फलियों को छील कर खाने लगी ।