#इन्दु_बाला_सिंह
‘आपने सुना ! अनन्या ने सुसाइड कर लिया है ।
पढ़ाई में तो ठीक ठाक थी । न जाने क्यों उसने
ऐसा कदम उठाया ।’
‘ अरे ! कब !’ मैं अपनी पड़ोसन का कथन सुन
चौंक पड़ी ।
मेरे लिये यह झटका था ।
मैंने उसे एक बार पार्क में खेलते हुये देखा था ।
उस ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा का चेहरा मेरी
आँखों के सामने कौंध गया ।
पड़ोसन बोली - ‘ सुसाइड का कारण अभी तक
पता नहीं चला है । ‘
मैं सोंचने लगी -
कितनी शांत शिष्ट लड़की थी ।
सड़क से अपने घर में लौट आई मैं ।
चुपचाप सोंचने लगी -
आख़िर किसका दोष है । माँ बाप की इकलौती
संतान का ये अंत ! .. हो सकता है कोई उसे
आनलाइन धमकी दे रहा हो । उसकी फ़ोटो
किसी पोर्न साईट पर डाल दिया हो । मेरे दिमाग़
में कितनी बातें घूमने लगीं ।
लड़की को बड़ा करना , उसे समझदार और
ज़िम्मेदार इंसान बनाना भी कितना कठिन काम
है ।
अख़बार की खबरों में लिखा रहता है लड़कियों
के लिये समाज ख़तरनाक होता जा रहा है ।
काश स्कूलों में हर महीने टीचर पैरेंट मीटिंग
होती ।
शिक्षक और अभिभावक् बच्चे के क़रीब आ पाते ।
ख़ाली घटना होने पर सोंचने से तो कुछ नहीं
होगा ।
-मैंने सोंचा ।
काश शिक्षक अनन्या का मन पढ़ पाते ।
आज तो एक की नौकरी से घर चलाना मुश्किल
हो गया है । माँ बाप दोनों अपनी अपने नौकरी
बचा पाने में संघर्षरत हैं ।
अनन्या की याद आते ही मेरा दिल बैठ गया ।
काश पड़ोसन की खबर झूठी हो ।
और दूसरे दिन शहर के समाचारपत्र के दूसरे
पन्ने पर स्कूल के नाम के साथ अनन्या के
सुसाइड की खबर छपी थी ।